सुना है चंडीगढ में कभी एक लेक होती थी
By किरन दीप
पानी की एक बूंद
पानी की एक बूंद से सागर तक
नदी के एक छोर से दुसरे छोर तक
प्यास है की बुझती नहीं
है पानी की जरुरत पर मिलता नहीं
कहते हैं की कभी जमीन से भी पानी निकालता था
कभी टयूबवेल के पानी से सीचे जाते थे खेत
अब है की जमीन से पानी निकलता ही नहीं
कभी नदियों और नेहरों में पानी बहता था
सुना है कभी गाबों में तलाब भी होते थे
सुना है चंडीगढ में कभी एक लेक होती थी
जहाँ टहलते थे लोग सुबह और शाम
और कभी माइग्रेटरी बर्ड्स भी आया करते थे
सतलुज और यमुना के वेटलैंड एरियाज में
और कभी आते थे हजारों की संख्या में माइग्रेटरी बर्ड्स
हरिकेपत्तन बर्ड्स सन्चुरी में भी
अब है की जमीन से पानी निकलता ही नहीं
Save water.... save ground water, lakes, rivers, canals, wetland areas
otherwise I feel people will have to face the same situation after 20 years down the line.
Regards
Kiran Deep

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