By Kiran Deep
झील का किनारा है
हमेसा से प्यारा
नाम है सुखना
मीठी यादों का किनारा है
धुंध की चादर में लिपटी झील ना जाने कितने लोगों का सहारा है
एक सिरे से दूसरे सिरे तक ना जाने कितनी कितनी यादों का खजाना है
लेक क्लब से चलकर झील के दूसरे किनारे तक हर चपे पर अजीब नज़ारा है
प्यारी प्यारी बतखों का झुण्ड अपनी मस्ती में दुनिया की चकाचौंध से कोसों दूर एक अजीब नज़ारा है
एक बार फिर याद आया हर कही उसी के नूर का नज़ारा है
हर पेड पर हर पते पर हर पेड कि डाली पर झील के किनारे एक अजीब नज़ारा है
झील के कनारे चलते चलते म्यूजिक के सुर जब कानों मैं पड़े तौ रूह को छू लेने का अजब नज़ारा है
मुझे जब भी रूह के करीब होने कि अनुभूति हुई, तो सुखना लेक का एक अजीब सहारा है
लेक की एक अजीब सी काशिश और सहारा है
फिर लेक में एक जगह लिखा पाया
सुखना झील पर जब भी आऐ मीठी यादें साथ ले जाऐ
God Bless all